बारहवीं कक्षा की एक लड़की क्लास में घुसती है और लड़के कहते हैं" अरे बारह बज गए " कई लड़के- लड़कियां जोर से हँसते हैं। पढ़ाने वाला अध्यापक भी ध्यान दिए बिना अपने काम में व्यस्त रहता है। जैसे ये एक मामूली- सी बात है। या ऐसा तो होता ही है। पर लड़की साथ पढने वाले अपने साथियों के इस सांप्रदायिक हमले से भौचक्की रह जाती है और उनकी अमानवीय हंसी उसे भीतर तक तोड़ देती है। अध्यापक का उदासीन रुख पूरी क्लास में उसे एकदम अकेला कर जाता है। न कहीं शिकायत कर सकती है न उस पिघले सीसे जैसी हंसी को कानों में जाने से रोक सकती है।जी हाँ उसका नाम अमनप्रीत ,जसविंदर या सिमरन दीप कौर कुछ भी हो सकता है।मुझे आज भी याद है बचपन में पिताजी के सरदार मित्र खुद पर चुटकुले सुनाकर हँसते हंसाते थे पर 84 के दंगों ने इस स्वस्थ हास्य को बाधित कर दिया। दंगों में उन पर हुई ज्यादतियों ने जहाँ एक ओर लोगों को सचेत किया वहां दूसरी ओर एक बड़ा वर्ग इस समुदाय को आतंकवादी की संज्ञा देने लगा। अभी कुछ दिन पहले सोनी चैनल के एक धारावाहिक परवरिश में पड़ोसी सरदार परिवार के शैतान बच्चे को आतंकवादी गया। क्या शैतान और आतंकवादी पर्यायवाची शब्द हैं? और क्या आप अपने शैतान बच्चे को आतंकवादी पुकारेंगे? कतई नहीं। इसकी लिखित शिकायत भी मैंने इन्डियन ब्राडकास्टिंग फाउंडेशन में की थी जिसका अब तक कोई जवाब मुझे नहीं मिला है।पर इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू ये भी है बात जब हिन्दू - मुसलमान की हो जाती है तो उसमें अधिकांश हिन्दू संप्रदाय एक होकर हर मुसलमान को आतंकवादी करार देते हैं। ये कैसी दोहरी नैतिकताएं हैं। जो अपने लिए न्याय चाहती हैं और दूसरे के साथ अन्याय करती हैं। मेरी एक परिचित जो अपने बच्चे को जूड़ी कहकर पुकारने पर बस चालक की शिकायत दर्ज करती हैं वही मुस्लिम बच्चों और वर्ग को अक्सर आतंकवादी का संबोधन दिया करती हैं। सांप्रदायिक हिंसा की ये जड़ें कितनी गहरी हैं जो जातीय नफरत में तब्दील होकर मनुष्यता से एक दर्जा नीचे गिरने का जोखिम आसानी से उठा लेती हैं। और धीरे -धीरे ये नफरत पीढ़ियां रचती चली जाती है इस विद्वेष को पालते -पोसते हुए।
सही कहा , लेकिन सन् 84 के बाद वर्तमान मे नाम सिंह व कौर की जगह खान और मोहम्मद हो गए है । दुख तब होता है जब इस नफरत को पढे लिखे लोग बढ़ावा देते है। आप जैसे समझदार लोगों की बहुत जरूरत है।
जवाब देंहटाएंसमाज में नफ़रत की जड़ें वर्चस्व को लेकर बहुत गहरी होती गयी हैं. नस्ल, रंग, वर्ण, जाति सब वर्चस्व की उपज हैं. इस वर्चस्व में खुद की श्रेष्ठता का भाव सन्निहित है. हिंदू-मुश्लिम संबंधों में यह वर्चस्व धार्मिक अन्धता, श्रेष्ठता और नफ़रत को लेकर है. अपने जीवन की एक घटना बताता हूँ, एक बहुत-बहुत-बहुत करीबी मित्र एक मुश्लिम लड़की से प्रेम करता है, लड़की भी करती है. लड़का दलित है और लड़की पर अपना प्रेम प्रकट नहीं कर पाता. लड़की मुखर होकर प्रेम प्रकट करती है. आस-पड़ोस में खबर फैलती है. लड़का लड़की से कभी प्रेम का खुलासा नहीं करता. लड़का योग्य (कॉलेज प्रोफ़ेसर) बनकर लड़की के पिता (कॉलेज प्रोफ़ेसर) से लड़की का हाथ मांगने का प्रण करता है. लड़के के एक फेवरेट प्रोफ़ेसर को सब पता है, वह कहते हैं तू काबिल बन मैं तेरा रिश्ता लड़की के पिता के सामने रखूँगा. (लड़की के पिता और ये प्रोफ़ेसर बहुत अच्छे मित्र हैं.) बात RSS, ABVP, विश्व हिंदू परिषद तक पहुंची. लड़के से डरा-धमका कर कहा गया- लड़की मुसलमान है, हिंदू होकर मुसलमान के शादी करेगा. तेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है क्या? लड़की के पिता से इन्हीं लोगों ने कहा - अपनी लड़की को समझाओ. लड़की के पिता परेशान होकर दूसरे शहर में बदली करवा लेते हैं. लड़का भी पीएच.डी के लिए बाहर चला जाता है. दोनों में कोई संपर्क नहीं. उन दिनों मोबाईल तो था नहीं, फोन भी आम नहीं थे. लड़की को गुमराह किया जाता है, लड़के द्वारा दूसरी लड़की के साथ शादी करने की अफवाह फैलाई जाती है.लड़का-लड़की का कोई संपर्क नहीं हो पता. विवश होकर लड़की आत्महत्या कर लेती है. उस समय लड़का अपने घर आया होता है. उसे अपने फेवरेट प्रोफ़ेसर से यह खबर मिलती है. लड़के को हार्ट अटेक आता है. ६-८ महीने बिस्तर में पड़ा रहता है जीने की उम्मीद छोड़ कर. एक लड़की (सवर्ण है ) उस लड़के से बहुत प्यार करती है. इन ६-८ महीनों में लड़के की खूब सेवा करती है. लड़का जीना नहीं चाहता लड़की कहती है- 'मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगी ' लड़की अपने परिवार में लड़के के शादी की बात करती है. उसके माता-पिता थोड़ी ना नुकर के बाद मान जाते हैं. दोनों परिवारों की रजामंदी से सगाई होती है. फिर RSS, ABVP, विश्व हिंदू परिषद के लोग लड़की और उसके परिवार को समझाने-धमकाने लगते है. लड़का दलित है, आप क्या कर रहे हो? आपकी बाकी लड़कियों की शादी नहीं हो पायेगी. अपने शादी की तो अच्छा नहीं होगा. .... खैर शादी होती है. दोनों को परेशां किया जाता है. झूठी अख्बारबाज़ी की जाती है, लड़की के चरित्र को लेकर गन्दगी उछाली जाति है....
जवाब देंहटाएंएक ही लड़का दो अलग-अलग परिष्ठितियों में हिंदू और दलित हो गया. यही है हिंदू वादियों-ब्राह्मणवादियों का असली-घिनोना-कट्टर चेहरा जिसे हमने बहुत भुगता और सहा है.